मुख्यमंत्री द्वारा सम्मानित गुलाम रसूल आज गरीबी और मुफलिसी में जीने को विवश !

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कटिहार (Syead Shadab Alam) बिहार के मुख्यमंत्री द्वारा सम्मानित खोजकर्ता गुमनामी और गरीबी में जीने को है मजबूर ,पैसे ना रहने और पैसे के आभाव में कूडो और कचड़ो के ढेर से जरुरी सामानो को खोजकर कर रहा है नए नए खोज ,, बिहार सरकार द्वारा आयोजित कई कार्यशालाओं में शामिल होकर अपने नए खोजो से कर चूका है ये खोजकर्ता कटिहार जिले का नाम रौशन ,अब गरीबी और मुफलिसी में नयी खोज पर लग रहा है विराम ,नही मिल रहा कोई मदद। कटिहार के रामपाड़ा के रहने वाले ये बूढ़े बुजुर्ग सफ़ेद दाढ़ी वाले 60 वर्षीय गुलाम रसूल हैं जिन्होंने अपनी पूरी ज़िन्दगी अनोखे खोज में लगा दिया ,अपने कमरे में टूटे फूटे सामानो को जोड़कर ने कुछ नया खोज करने की कोशिश में हैं,ये कुछ ऐसा सामान तैयार करना चाहते हैं जो गाँव के गरीब इलाके के रहने वालो को कुछ फायदा मिल पाये ये हमेशा इसी सोच और बिजली जैसे संकट को ध्यान में रखकर ही अपने नए खोज में दिन रात लगे रहते हैं ,लेकिन इतना वो तभी कर पाएंगे जब उनके पास कुछ पूंजी हो और उस पूंजी से सामान खरीदकर अपने खोज को मुकम्मल कर पाये लेकिन कोई मदद ना मिल पाने से ये काफी नाराज हैं और लोगो द्वारा कूड़ा समझकर फेके गए सामानो को ये सड़को और कूडो और कचड़ो के ढेर से इकहट्टा करते हैं और अपने उसी टूटे फूटे सामानो को जोरकर नयी खोज को अंजाम देते हैं

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एक झोला हाथो में लिए कूडो और कचड़ो के ढेर में सामानो को खोजता ये शक्श कोई मामूली इंसान नही है ,ये वो शक्श है जिसने कभी पटना में आयोजित बिहार सरकार के सेमीनार में नए खोजकर्ताओं द्वारा आयोजित कार्यक्रम में अपने बनाये गए सामानो से लोगो को चौंका दिया था और कटिहार का नाम रौशन किया था ,लेकिन आज तंगहाली और पैसे की कमी ने इन्हे सड़को पर कूड़ा कचड़ो में सामानो को चुनने पर मजबूर कर दिया है ,अपने छोटे से कमरे में कचड़ो और कूडो से जमा किये गए सामानो को जोड़कर इन्होने एक अनोखा लैंप तैयार किया है ,जिसमे उन्होंने सोलर ,रेडिओ ,मोबाइल ,पंखा ,जैसे कई सामानो को एक जगह कर भारत के नाम से एक नया इलेक्ट्रॉनिक का सामान बना दिया है ,और ये दावा भी करते हैं की सरकार अगर मदद करे तो ये बिना बिजली के हर गाँव और शहर को रौशन कर सकते हैं।

बूढ़ी आँखें उनके तंगहाली को बयां करने के लिए काफी है लेकिन इनके हौसले आज भी बुलंद हैं सरकार की मदद मिले तो एक बड़ा फायदा देश को मिल सकता है ,लेकिन फिलहाल ये खोजी बदहाली और तंगहाली  ज़िन्दगी जीने को मजबूर है।