किसी पार्टी के जिला अध्यक्ष की हत्या की पहली घटना। सांसद विधायक सहित सभी दलों ने की मातमपुर्सी !

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मृतक के परिजनों से मिलते छातापुर विधायक नीरज बबलु एवं अन्य

सहरसा -(kunal kishor) युवा राजद अध्यक्ष श्याम सुन्दर तांती की निर्मम हत्या ने जिले के राजनितिक इतिहास को कलंकित कर दिया। वर्षों के राजनितिक सफर में यह पहला वाक्या है जब किसी राजनीतिक दल के जिला अध्यक्ष की हत्या कर दी गयी हो। हालांकि यह बात और है कि जिले राजनीतिक हत्यायें हुई है लेकिन किसी पार्टी के अध्यक्ष की नहीं।

मृतक राजद नेता
मृतक राजद नेता

जानकर की माने तो अब तक तीन ऐसी हत्याएं हुई जो काफी तूल पकड़ा। मगर इसमें कोई अध्यक्ष नहीं था। कांग्रेस के कुंवर सिंह, जनता दल के महेश जायसवाल और कम्युनिष्ट पार्टी के जयप्रकाश यादव की हत्या अभी भी लोगों के जेहन में है। जयप्रकाश की हत्या जहानाबाद में और दो नेता की हत्या शहर में ही बड़ी बेरहमी से कर दी गयी थी।

घटना स्थल पर पुलिस जवान
घटना स्थल पर पुलिस जवान

मगर युवा राजद अध्यक्ष की हत्या ने जितनी सहणीभूति बटोरी पहले की हत्या उतनी नहीं बटोर सकी। काफी सरल और मिलनसार श्याम सुन्दर तांती की हत्या की खबर फैलते ही सत्ताधारी दलों से लेकर विरोधी दलों के लोग भी सांत्वना देने मृतक के घर पहुँच गये। हत्या क्यों और किस वजह से हुई यह पुलिस अनुसन्धान में खुलासा होगा।लेकिन मृतक के घर पहुंचे सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव, पूर्व सांसद लवली आनंद, विधायक अरुण यादव, विधायक नीरज कुमार बबलू, पूर्व मंत्री अशोक  सिंह,

पुर्व विधायक संजीव झा एवं अन्य
पुर्व विधायक संजीव झा एवं अन्य

पूर्व विधयक संजीव झा आलोक रंजन, जदयू अध्यक्ष धनिक लाल मुखिया एवं शेर अफगन मिर्जा उर्फ अग्गम, राजद के मोहम्मद ताहिर सहित अनेक लोगों ने इसे दुखद बताया। इसे इत्तिफाक ही कहेंगे की पांच भाइयों वाले श्याम सुन्दर तांती के घर अलग अलग दलों के समर्थक थे। मृतक राजद के निष्ठावान थे तो एक भी गरीब दास जदयू के संगठन मंत्री और दुसरे भाई रोहिन दास आनंद मोहन के खांटी समर्थक। ऐसे में लोगों को यह समझ में नहीं आ रहा है की हत्यारों ने घर से बुलाकर इतनी बेरहमी से क्यों मारा। हत्यारों का मकसद सिर्फ हत्या करना था। हत्या के तरीकों से यह साफ है। अब पुलिस के हत्थे सारा मामला है की वह इस मामले का उद्भेदन सही तरीकों से कब और कब तक कर पाती है। ताकि लोगों को यह पता चले कि एक मिलनसार राजनितिक कार्यकर्ताओं की हत्या के पीछे कौन सा मकसद था।