नशाखुरानी गिरोह का शिकार – जब रेल पुलिस प्राथमिकी ही दर्ज नहीं करेगी तो जाँच कौन करेगा?

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नशाखुरानी गिरोह का शिकार बने बुजुर्ग दंपति

(koshixpress desk ) पूर्व मध्य रेल के समस्तीपुर मंडल रेल क्षेत्र अंतर्गत बरौनी-खगडिया रेलखंड के बीच इन दिनों जहरखुरानी गिरोह काफी सक्रिय हो गया है। जहरखुरानी गिरोह अब रेल यात्रियों को लूटने के लिए सहयात्री बनकर लूट रहे हैं। इस बात का खुलासा तब हुआ जब दिल्ली से वापस अपने घर सहरसा के सिमरी बख्तियारपुर अनुमंडल क्षेत्र के गांव भोटिया जा रहे 82 वर्षीय रामदेव सिंह सिंह व पत्नी उर्मिला देवी को जहरखुरानी गिरोह ने अपना शिकार बना लिया। 15 अप्रैल 2016 को दिल्ली से ट्रेन संख्या 12488 सीमांचल एक्सप्रेस के सेकंड एसी के डब्बा संख्या एबी व सीट नंबर-2 एवं 4 में यात्रा कर रहे रामदेव सिंह ने बताया की सह यात्री ने दवाब बनाकर लिम्का पिलाकर नकदी सहित करीब 75 हज़ार रुपये का लुटेरों ने चपत लगाकर फरार हो गया। जबकि इन वृद्ध रेल यात्री को खगड़िया स्टेशन ही उतड़ना था, लेकिन बेहोशी की हालात में वृद्ध दम्पति के होने की वजह से राजकीय रेल पुलिस कटिहार के एक जवान ने कटिहार में करीब दो-ढाई के बीच ट्रेन से उताड़ा। इस यात्री के यात्रा टिकट का पीएनआर नंबर 2545349141 है। दिल्ली के आंनद बिहार टर्मिनल से 15 अप्रैल को यात्रा शुरू करने वाले पीड़ित वृद्ध रेल यात्री रामदेव सिंह का कहना है कि मेरे सहयात्री सीट नंबर एक व दो था ने ही कोल्ड ड्रिंक पिलाया। जबकि मैं कोल्ड ड्रिंक पीने से इंकार किया तो विश्वास में लेकर मुझे और मेरी पत्नी को पिला दिया। पिने के कुछ देर में ही हम दोनों को पता नहीं चल सका और सुध-बुध खो बैठा। मुझे जब कटिहार में रेल पुलिस ने नीचे उताडा तो मेरा सारा सामान और नकद रूपया गायब था। इसी बीच दिल्ली से मेरे पुत्र पवन कुमार सिंह ने जब अपनी माँ के मोबाइल पर फ़ोन किया तो रेल पुलिस ने मेरे लड़के को सारी जानकारी दी। तब जाकर मेरे लड़के ने कटिहार स्थित मेरी भतीजी को मोबाइल किया तो उसके बाद प्राथमिक उपचार के लिये चिकित्सक के यहाँ ले गया। इधर, परिजन प्राथमिकी दर्ज कराने जब राजकीय रेल थाना कटिहार गए तो थाना पुलिस ने प्राथमिकी तो दूर आवेदन लेने से भी इंकार कर गए। अब सवाल उठता है कि वृद्ध रेल यात्री सफ़र कैसे करे। जब एसी टू में इस कदर अपराधी घटना को अंजाम दे बैठते हैं तो सामान्य डब्बा में क्या होगा। जबकि एसी टू में कोच इंचार्ज भी होते हैं, आखिर ये लोग क्या कर रहे थे। यह पूरा मामला जाँच का विषय है और एक व दो नंबर सीट पर यात्रा कर रहे यात्री के भी खोजबीन की जरुरत है। जब रेल पुलिस प्राथमिकी ही दर्ज नहीं करेगी तो जाँच कौन करेगा?

श्रोत- पत्रकार संजय सोनी