अब न जमा रहेंगे पीने वाले और न जगा करेगी मधुशाला !

2005
तस्वीर- सांकेतिक मात्र

सहरसा (koshixpress) बड़े- बड़े परिवार मिटे यो, एक न हो रोनेवाला, हो जाये सुनसान महल वे, जहां थिरकती सुरबाला, राज्य उलट जाये, भूपों की भाग्य सु लक्षमी सो जाएं, जमे रहेंगे पीने वाले, जगा करेंगी मधुशाला। भारत के दिग्गज कवि और महानायक अमिताभ बच्चन के पिता स्व० हरिवंश राय बच्चन ने बड़ी ही सूझबूझ के साथ उपयुक्त पंक्तिया लिखी थी कि राज्य भले उलट जाये लेकिन जमे रहेंगे पीने वाले।

मगर अब हालात बदल गये क्योंकि न तो अब पीने वाले मिलेंगे और न ही मिलेगी कहीं शराब की दुकानें। वजह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का साहसिक फैसला। राज्य में पूर्ण शराबबंदी कानून लागू किये जाने का असर दिखने लगा है। एक अप्रैल से देसी और पांच अप्रैल से अंग्रेजी की बिक्री पर रोक और इसके उल्लंघन करने वालों के खिलाफ बने सख्त कानून ने राज्य में नशे के आदि हो चुके लोगों को उससे छुटकारा पाने के लिए मजबूर कर दिया है। वर्षों से शराब के आदी रहे लोग अब खुद ब खुद चलकर नशा मुक्ति केंद्र पहुँचते है और डॉक्टरों से बुरी लत को छुड़ाने की गुहार लगा रहे है।  मुक्ति केंद्र के डॉक्टरों का कहना है कि नशे के आदी हो चुके लोग विवश और  लोकलाज के चलते मुक्ति केंद्र की बजाय निजी सलाह लेकर नशा से मुक्त होने के माध्यम में लगे हुए है। राज्य में शराबबंदी कानून लागू होने के पहले चौक चौराहों से लेकर बस स्टैंड और सार्वजनिक स्थानों पर पीने वालों का यह हाल था कि आम लोगों को उधर से गुजरने में परेशानियां का सामना करना पड़ता था। यह बात और है कि नशाबंदी कानून लागू होने के साथ ही बड़े पैमाने पर इसका स्टॉक करके रख लिया गया। लेकिन कानूनी प्रावधान का खौफ इतना खतरनाक है कि जमाखोर यत्र तंत्र शराब को छोड़ रफूचक्कर हो रहे है। पूर्ण शराबबंदी कानून के बाद अब तक बड़े पैमाने पर जब्त किये गए देसी विदेशी शराब के बारे में उत्पाद विभाग का यही दावा है। चौक चौराहों पर भूजा वालों की दुकान हो या मांस मछली के होटलों में न तो शराबियों की भीड़ जमा होती है और नहीं असली ग्राहकों को कोई परेशानी। मुख्यमंत्री के फैसले के पहले शहर क्या कस्बों तक में रात भर देसी विदेशी शराब ऊँची कीमतों पर उपलब्ध हो जाती लेकिन अब नही। अगर किसी के पास उपलब्ध भी है तो वह भय से स्वीकारते तक नहीं। आम लोगों का यही कहना की इस मामले  में आगे भी यही सख्ती बनी रहे।

इस तरह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार  के फैसले ने स्व० हरिवंश राय बच्चन जी की कविता का राज्य में फिलहाल भाव ही बदलकर रख दिया है  “की अब न जमा रहेंगे पीने वाले और न जगा करेगी मधुशाला” ।