विशेष : डॉ० हरिशंकर श्रीवास्तव “शलभ” के 85वीं जन्म दिवस पर !

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डा. हरिशंकर श्रीवास्तव "शलभ"

(koshixpress desk )12961318_841108506035893_3779933515953272141_o कोसी इलाके के बड़े नाम जिन्होंने साहित्य और इतिहास को बहुत करीब से जिया है डा. हरिशंकर श्रीवास्तव “शलभ” के आज 85वीं जन्म दिवस पर उन्हें बधाई एवं दीर्घायू होने की मंगलकामनाएं…. दर्जनों पुस्तक के रचयिता विद्वान साहित्यकार श्री शलभ जी की पहली पुस्तक 1951 में ‘अर्चना’ ने उनके कलम को इस तरह धारदार बनाया कि अविराम चलता रहा और “आनंद, मधेपुरा में स्वाधीनता आंदोलन का इतिहास, शैव अवधारणा और सिंहेश्वर स्थान, मंत्र दृष्टा ऋष्य श्रृंग, कोसी अंचल की अनमोल धरोहरे, कोसी तीर के आलोक पुरुष, अंग लिपि का इतिहास, एक बंजारा विज़न में” जैसे शोध ग्रंथों को आकर दिया | इनकी रचनाओं में मानवता की सनातन भावद्वन्दता की अभिव्यक्ति है | इसी में से इनकी एक पुस्तक ‘अंग लिपि का इतिहास’ साहित्य में मिल का पत्थर है जो आज भी भागलपुर विश्वविद्यालय के अंगिका स्नातकोत्तर वर्ग के पाठ्यक्रम में निर्धारित है | इनकी कई कविताएं आकाशवाणी से भी प्रसारित हो चुकी है | इन्होंने हिंदी साहित्य को इस कदर जिया की 60 के दशक में गीत काव्य में भी छाये रहे | उम्र के 84 बसंत निहार चुके शलभ जी का आरम्भिक काल राष्ट्रकवि रामधारीसिंह दिनकर, आचार्य जानकी बल्लभ शास्त्री, आरसी प्रसाद सिंह, कलक्टर सिंह केशरी, पौद्दार रामोतार अरुण अदि महान साहित्यकारों के सानिध्य में बीता | सन् 2000 ईस्वी में विश्व हिंदी सम्मेलन, नई दिल्ली द्वारा लन्दन में भारतीय उच्चायुक्त रहे डा. लक्ष्मी मल सिंही ने इनकी साहित्यिक उपलब्धियों के लिए इन्हें स्वर्ण पदक सम्मान प्रदान किया तथा सहस्त्राब्दी हिंदी सहित कई सम्मानों से इनको नवाजा गया |
इनके हर योगदानों के लिए ह्रदय से सलाम….

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श्रोत- Bandan Kumar Verma के टाइम लाइन से …