शराबबंदी और बिहार, राज्य की जनता बेहाल

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तस्वीर सांकेतिक मात्र

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( koshixpress डेस्क )
संस्कृति व संस्कार पर आश्रित बिहार की जनता के समक्ष पूर्णतया शराबबंदी के आज पांचवें दिन भी किसी खास चुनौती से कम नहीं गुजरा होगा.
शराबबंदी के लिए कुछ तो सड़कों पर उतरकर कुछ तो अख़बारों में बयान देकर सूबे के मुखिया नीतीश कुमार के इस ऐतिहासिक कदम का ना केवल स्वागत कर रहा है बल्कि बगल में बैठे होते तो पीठ भी थपथपाने से नहीं चूकते. क्या किसी ने कभी यह सोचा की नीतीश कुमार ने ही बिहार के गांव-गांव में शराब की कम्पोजिट स्कीम की दुकाने खुलवाकर दस साल में आदत ख़राब कर दिया. शराब की ठेकेदारी से कितने चोर, उचक्के, अपराधी, माफिया भिखमंगा से करोड़पति बन गए. अब शराबबंदी से जहां इस कारोबार में लगे माफिया बेरोजगार हो गए वहीं शराब के आदि शराब के बगैर पूरी नींद सो भी नहीं पा रहे हैं. मेरे कहने का मतलब ये नहीं की शराबबंदी ख़राब बात है. हालांकि शराबबंदी के साथ ही हरेक ज़िलों में नशा मुक्ति केंद्र भी पहली अप्रैल से चालू है. लेकिन सरकार ने कभी ये नहीं सोचा की देवी,देवता और कुल देवता पर भी ना केवल शराब बल्कि गांजा व भांग भी अपनी-अपनी मन्नतों के पूरा होने पर चढ़ाया करते हैं. इस तरह की संस्कृति और संस्कार सिर्फ बिहार में ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण देश के विभिन्न जाति,धर्म के लोगो में ऐसा देखा जाता है.

तस्वीर सांकेतिक
तस्वीर सांकेतिक


सुनने में आया है की कही शराब के बिना पुलिस वाले तो कही महादलित की मौत हो गयी. आखिर ये क्या हो रहा है, हमारे कुछ मित्र जो शराब का सेवन करते हैं, उनको कम और ना पीने वाले मित्रो को ज्यादा परेशानी हो रही है. दिनभर वही शराब और पाबन्दी की चर्चा होते रहती है. इन पाँच दिनों से तंग आ गया हूँ, आखिर करूँ तो क्या करूँ…

कवि महाप्रकाश की ये पंक्ति …..ये है मेरा आजमाया नुस्खा जो मेरे गले मे उतरकर….आस्ते आस्ते मेरे माथे के बेचैन नसों को सहलाती है । नकली ही सही आराम तो पहुचाती है |


इसी बीच दिल्ली आने का मौका लगा. दिल्ली स्थित ऐतिहासिक इंद्रप्रस्थ के पुराना किला के क्षेत्र में श्री किलकारी बाबा भैरोनाथ जी की पांडवकालीन मंदिर है और ताज्जुब है कि बाबा भैरोनाथ जी को लोग पूजा-अर्चना में शराब चढ़ाते हैं और चढ़ायी गयी शराब को खुद सेवन करते हैं और गरीबों के बीच बाँट भी देते हैं. इसका मतलब शराब ख़राब नहीं पीने वाले ख़राब होते हैं.
बिग बी अमिताभ बच्चन की चर्चित फ़िल्म शराबी के गाने के ये बोल”नशा शराब में होती तो नाचती बोतल”
इस सरकार ने लोगों को कानून से सुधारने के बजाय शराब को ही बंद कर दिया. हम सबों के बीच शराबी को सुधारने की कवायद होनी चाहिए थी,लेकिन सरकार ने पेड़ को ही काट डाला…

( जाने-माने पत्रकार Sanjay Soni Journalist के फेसबुक पेज से )