बिहार : पुर्ण शराबबंदी के बाद गौमांस पर लगे पुर्ण प्रतिबंध !

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सहरसा- तमाम आशंकाओ, इफ एंड बट को ध्वस्त करते हुए आपने बिहार को पूर्ण ड्राई स्टेट बना दिया । आज हम बिहारी काफी गौरवान्वित हैं, आपके इस ऐतिहासिक कदम के लिए आपको सलूट करते है साथ ही साथ आपको धन्यवाद भी देते हैं । पिछले वर्ष जब आपने शराबबंदी का वायदा किया था, उस समय से लेकर विधानसभा चुनावो के प्रचार एवं उसके बाद भी आप विपक्षियों के निशाने पर रहे लेकिन आज वही सारे लोग आपके फैसले का स्वागत कर रहे हैं । ये कतई आसान नहीं था क्यूंकि समाज में इसकी स्वीकार्यता होने के साथ साथ यह राजस्व का बहुत बड़ा साधन भी था परंतु सुसासन संकल्प की आपकी प्रतिबद्धता ने आपको यह कदम उठाने का सम्बल दिया । आपने जन्मनास के हित एवं जनभावना का ख्याल रखते हुए यह जो ऐतिहासिक निर्णय लिया है इससे मेरी उम्मीदें आपसे काफी ज्यादा बढ़ गयी हैं । विधानसभा चुनावों के वक़्त शराबबंदी के साथ साथ गौमांस का मुद्दा भी काफी ज्यादा तूल पकड़ चूका था , तब आपके विपक्षियों ने बीफ बैन की बात की थी वहीँ दूसरे पक्ष ने यह कहा था की कोई क्या खाये-पिए क्या नहीं इसपर सरकार का नियंत्रण नहीं होना चाहिए अन्यथा यह संविधान प्रदत्त मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होगा । उस वक़्त आपने इस बयान का समर्थन भी किया था । आज जब आपने ‘क्या नहीं पियें पर नियंत्रण लगा दिया है तो “क्या नहीं खाएं” पर चर्चा नहीं हो सकती क्या ? शराब अगर जानलेवा है तो गौमांस भी जीवनदायनी तो नहीं है । खेती-किसानी, विभिन्न असाध्य रोगों से निजात दिलाने के साथ साथ मानव जाती के लिए विभिन्न महत्वपूर्ण आवश्यकताओं के गाय की उपयोगिता को मुझसे कही बेहतर आप जानते हैं । एक किसान जिसके परिवार के भरण-पोषण से लेकर शिक्षा-दीक्षा एवं शादी ब्याह तक में गाय की महती भूमिका है, एक असहाय रोगी जिसके लिए गौमूत्र से बनी औषधियां जीवनदायनी है क्या ऐसे लोगों की भावनाएँ आहात नहीं होती होंगी जब महज पेट भरने के लिए गाय की कटी हुई लाश हो यह देखते होंगे ? यह दृश्य देखने के बाद समाज में घृणा एवं विद्वेष का माहौल बनता है । आज जब सहिष्णुता,असहिष्णुता­­ के चर्चे जोड़ो पर हैं तो क्या इन विद्वेषों को जड़ से समाप्त करने के लिए इस विषय पर सोचने की आवश्यकता नहीं है ? समाज के बड़े हिस्से में पनप रहे घृणा को समाप्त कर भाईचारे के साथ समरस समाज की परिकल्पना को प्रभावी बनाने के लिए आप गौमांस पर प्रतिबन्ध लगाने के विषय पर सोचें ये मेरा आपसे विनम्र आग्रह है । ऐसा हो जाने से घर-घर में ईद मनेगी, घर घर होली खेलेगा. ईद की सेवइयों के साथ साथ होली के दही बाड़े सामान रूप से चखे जायेंगे । शराबबंदी के आपके फैसले से बेहद हर्षित हूँ और साथ ही आपकी प्रतिबद्धता का कायल भी, इसलिए आपसे उम्मीद करते हुए यह निवेदन करता हूँ की हमारे आस्था एवं मान्यताओं के नाभिकुंड, जनमानस के लिए परमोपयोगी गाय की रक्षा करेंगे और जनभावना का ख्याल रखेंगे ।
अंत में पुनः आपको इस ऐतिहासिक फैसले के लिए धन्यवाद एवं निवेदन पर विचार करने का विनम्र आग्रह ।

यह आलेख युवा छात्र somu anand का अपना निजी विचार है |