एक रूपए में नशा कर रहे है लोग, भांग की बिक्री चरम पर !

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बिहार में पूर्ण शराब बंदी लागू होने के बाद नशेड़ी अब नए-नए तरीके अपनाने लगे है।भांग, गांजा,कोरेक्स,सुलेशन,व्हाटनर, आयोडेक्स,फोट्विन  जैसी नशीली चीजे  अब लोकप्रियता हासिल कर रही हैं। सबसे खास बात यह है की उपरोक्त समान बाजारों में उपलब्ध भी है और शराब बंद होने के बाद लोग नशे के लिए इसका उपयोग करने पर उतर गए है |

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बिहार में पुर्ण शराबबंदी के बाद शराब की तलब को बुझाने के लिए नशेड़ी भांग,गांजा,कोरेक्स,सुलेशन,व्हाटनर, आयोडेक्स,फोट्विन,लहरी मुनक्का,रौकेट मुनक्का,सुहाना पर झूमना शुरू कर दिया है। भांग,रौकेट मुनक्का,लहरी मुनक्का,सुहाना शराब के आदि हो चुके नशेड़ियों का नया नशा है। यूं तो नशे के आदि नशेड़ी भांग, सुहाना,रौकेट,गांजा,कोरेक्स,सुलेशन,व्हाटनर, आयोडेक्स,फोट्विन लहरी मुनक्का का अर्से से इस्तेमाल करते रहे हैं, लेकिन शराब के आदि पियक्कड़ों के लिए भांग,सुहाना,लहरी मुनक्का नया शगल बना है।

बाजारों में मिलने वाला भांग |
बाजारों में मिलने वाला भांग |

पैकेट बंद रौकेट,सुहाना की बिक्री की धुम :
शराब के आदतन लोग अपनी तलब को शांत करने के लिए भांग,रौकेट,सुहाना सहित जैसे नशे का लगातार सेवन करते चले रहे हैं। रौकेट मुनक्का और सुहाना  नाम से बिकने वाले इन नशीले पदार्थों के सेवन से शराब की तलब को शांत कर रहे हैं। खास बात यह है की यह महज 1 रु से 5 रु में पान की दूकानों में आसनी से मिल जा रहा है | वही भांग शहरी सहित ग्रामीण क्षेत्रो  के गली-मुहल्ले से लेकर बिभिन्न चौक-चोराहो पर आसानी से मिल जाता है | गांजा पर रोक के बाद भी छोटी-छोटी गुमटी सहित चाय की दूकानों पर पाउच सहित सिगरेट में भाडा गांजा आसानी से मिल जा रहा है | इन नशे की चीजो की कीमत भी कम है |

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आयुर्वेदिक औषधि के नाम पर बेची जा रही है भांग :
नशेड़ियों का कहना है कि यह सस्ता है। एक पान दुकानदार ने बताया कि अब वह रोजाना 40 से 50 रौकेट मुनक्का,एवं सुहाना  बेच दे रहा है। यह रौकेट मुनक्का पान दुकानों पर आयुर्वेदिक औषधि के नाम पर बेची जा रही है। इसके रैपर के ऊपर आयुर्वेदिक औषधि भी लिखा हुआ है। रौकेट के रैपर के ऊपर निर्माण सामग्री में मुनक्का, शक्कर, सेंधा नमक, जीरा, इलाइची, अजवाइन काली मिर्च जैसी की सारंगियों के नाम अंकित हैं।
शराब के आदतन लोग पहले तलब बुझाने के लिए प्रति बोतल 50 रुपए से लेकर 120 रुपए तक खर्च करते थे। यानी अगर देसी के शौकीन हैं तो प्रति बोतल 50 रुपए देने पड़ते थे। अगर अंग्रेजी ब्रांड के शौकीन हैं, तो उसके लिए कम से कम सौ रुपए खर्च करने पड़ते थे। अब जब भांग,रौकेट मुनक्का,सुहाना  नशे का क्रेज तेज हुआ है तो शराब के शौकीनों को महज एक रुपए खर्च करने पड़े रहे हैं।

वैधानिक चेतावनी- किसी भी तरह का नशा स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है …..