असली कहानी तो ‘टाइमपास’ की है !

1219

वह ‘अच्छे वक़्त का राजा’ है. सो ‘अच्छे दिनों’ की बहती बयार में उड़नछू हो गया! अब वह वहाँ मज़े से अपने ‘अच्छे दिन’ बितायेंगे. जैसे ललित मोदी बिता रहे हैं! सब पूछ रहे हैं, अरे ये कैसे हो गया? इतना माल गड़प कर माल्या जी कैसे उड़ गये? कैसे उड़ सकते हैं? यह भी कोई पूछने की बात है भला? उड़ना और उड़ाना तो माल्या जी का बड़ा पुराना शग़ल रहा है. उन्होंने जहाज़ भी उड़ाये और बैंकों के पैसे भी उड़ाये! जहाज़ उड़ते रहे, साथ-साथ बैंकों के पैसे भी उड़ते रहे! लोग देखते रहे. बैंक भी पैसों को उड़ते हुए देखते रहे. सरकार भी देखती रही. सब देखते रहे. और पैसे उड़ते रहे, पार्टियों में, शान-शौकत में, मौज में, मस्ती में. उनके कैलेंडर लोगों के होश उड़ाते रहे और वह नीलामी में गाँधी का चश्मा और टीपू सुल्तान की तलवार ख़रीद कर ‘देश की इज़्ज़त’ को धूल में उड़ने से बचाते रहे! तो इस बार वह बैंकों की नींद उड़ा कर ‘पूरी इज़्ज़त से’ बाहर उड़ गये!

Vijay Mallya Loan Default - Raag Desh 120316
क्या पहली बार हुआ है ऐसा ‘उड़’ जाना ?
और ऐसा ‘उड़’ जाना कोई पहली बार हुआ है? ओत्तावियो क्वात्रोची भी कभी ऐसे ही उड़नछू हो गया था. और भोपाल गैस कांड के मुख्य आरोपी वारेन एंडरसन को तो ‘उड़ जाने के लिए’ ख़ैर हम बाक़ायदा एअरपोर्ट तक छोड़ कर आये थे. फिर दुबारा न कभी क्वात्रोची तक हमारे हाथ पहुँच पाये और न एंडरसन तक. अदालतें उन्हें भगोड़ा घोषित करती रहीं, अदालतों के टाइपराइटर खड़कते रहे, क़ानूनी काग़जों के घोड़े दौड़ते रहे, सरकारों में लिखा-पढ़ी, चिट्ठी-पत्री चलती रही यहाँ से वहाँ, वहाँ से यहाँ. सबको मालूम था कि कुछ नहीं होना है, कुछ नहीं हो सकता है. ये सब बस ‘टाइमपास’ है. तो ‘टाइमपास’ होता रहा, दोनों अब स्वर्ग सिधार चुके हैं. न बोफ़ोर्स का रहस्य खुला और न कभी खुलेगा, न भोपाल के गैसपीड़ितों को न्याय मिला और न कभी मिलेगा. क़िस्सा ख़त्म! तो अब माल्या को लेकर भी ‘टाइमपास’ करते रहिए!

विस्तार से पढने के लिए click करे ….. http://raagdesh.com/vijay-mallya-loan-default-and-the-unending-story-of-timepass/