ईलाज के अभाव में गर्भवती महिला की मौत ! हाल सहरसा सदर अस्पताल का

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मृतिका गायत्री देवी
फोटो -फ़ाइल
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सहरसा – बिहार सरकार द्वारा बेहतर चिकित्सा सुविधा के दावे को लेकर दिनोदिन संसाधनों में बढ़ोतरी तो की जा रही है लेकिन मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध होता नहीं दिख रहा है। जिले का सदर अस्पताल इसकी बानगी है।लाख प्रयास के बावजूद सदर अस्पताल में व्याप्त कुव्यवस्था को दूर नहीं किया जा रहा है। मरीजों को घोषणा के अनुरुप दवाएं नहीं मिल रही है। दवा के लिए मरीजों को बाहरी दुकानों का सहारा लेना पड़ता है। कोसी का पीएमसीएच कहलाने वाला सदर अस्पताल में बुधवार की रात एक गर्भवती महिला इलाज के आभाव में तड़प- तड़प कर दम तोड़ दी। काफी गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाली गायत्री देवी से इलाज के लिए दस हजार रुपये की मांग कि गयी जो देने में वह असमर्थ थी। परिणाम हुआ की उसका उपचार नहीं हुआ और दर्द के मारे उसने दम तोड़ दी। महज 27 साल की मृतक चन्दन दास की पत्नी थी और नौहट्टा थाना के मोहनपुर गांव की रहने वाली थी। घटना के बाद अपनी नाकामी को छुपानेे के लिए सिविलसर्जन सहित अस्पताल प्रशासन पुलिस के सहयोग से जल्द से जल्द लाश सहित उसके परिजनों को घर भेजवाने के जुगाड़ में लगे रहा। खुद सिविलसर्जन डा० अशोक कुमार सिंह पौने सात बजे अस्पताल पहुंचकर अपने पुरे कुनबे के साथ मृतक के परिजनों को लाश लेकर घर जाने का आरजू मिन्नत करते रहे। सिविलसर्जन के पहुँचने के पहले ही काफी संख्या में थाना से पुलिस बल अस्पताल पहुच चूका था। हॉलाकि सिविल सर्जन से मरीज से पैसा मांगने सहित इलाज में कोताही बरतने से इंकार करते हुए कहा की सबेरे सबेरे अस्पताल आना उनकी ड्यूटी है। उन्होंने कहा की मरीज की स्वाभाविक मौत हुई है। पैसा मांगने के आरोप को सिविलसर्जन ने दूसरों के द्वारा सिखाकर कहलवाना करार दिया। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया की मरीज की मौत के बाद जब परिजनों का चीत्कार शुरू हुआ तो ड्यूटी पर तैनात महिला चिकित्सक सहित नर्स अस्पताल छोड़कर चले गए। बाद में सिविलसर्जन ने यह स्वीकार किया कि अगर मामला वाकई में है इसकी जांच करायी जायेगी।