बाबा कि समाधि……….. आस्था या अंधविश्वास

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बाबा

बाबा की समाधी आस्था या अंधविश्वास (जरुर देखे यह वीडियो)

समाधि का 6 छठा दिन 

समाधि स्थल
समाधि स्थल

सहरसा – मधेपुरा जिले के चौसा थाना अंतर्गत भटगामा जीरोमाइल के नाथ बाबा मंदिर के पास भू-समाधि लिये प्रमोद बाबा को बाहर निकालने का प्रशासनिक प्रयास विफल हो गया। 14 मार्च से शुरू होने वाले विराट विष्णु महायज्ञ की सफलता को लेकर 28 फरवरी से 12 मार्च तक प्रमोद बाबा जमीन के भीतर समाधि लिये हुए हैं और 13 मार्च समाधि से बाहर आएंगे। प्रमोद बाबा की उम्र महज तीस साल है ,इनका जन्म पूर्णिया जिले के बलुआ ग्राम के रूपौली प्रखंड में हुआ है।प्रमोद बाबा के माता, पिता सहित अन्य सगे-संबंधी समाधि स्थल के पास डेरा डाले हैं। समाधि स्थल के पास अखंड रामायण पाठ, भजन-कीर्तन चल रहा है। मधेपुरा प्रशासन के लिए बाबा की समाधि सिर दर्द बन गई है। 14 फीट लंबाई, 14 फीट चौड़ाई और 4 फीट गहरे बने गड्डे में बाबा समाधि लिए हुए है।इस बीच उदाकिशुनगंज के S.D.O और S.D.P.O समेत कई वरीय अधिकारियों का समाधी स्थल पर पहुँचते का सिलसिला जारी है ताकी बाबा को समाधि से बाहर निकाला जा सके,लेकिन बाबा के भक्तों सहित श्रधालुओ ने बाबा को जमीन से बाहर निकालने से मना कर दिया। बाबा को समाधि लिए आज 6 छठा दिन है लेकिन अब तक तक श्रद्धालु और प्रसाशन के बीच मान मन्नौवल के बाद बाबा के समाधी स्थल से प्रशासनिक अधिकारियों को बैरंग वापस आना पड़ा।
बाबा की समाधि के सबाल पर अनुमंडल पदाधिकारी उदाकिशुनगंज मुकेश कुमार कहते है कि चौसा हमलोग गए थे ,डी.एस.पी साहब के साथ स्थल का भ्रमण भी किए थे ,बाबा का वहाँ कुछ तपस्या वगैरह चल रहा है ,चुकि ये आस्था से भी जुड़ा हुआ है और धार्मिक मामला है हमलोग नजर बनाये हुए है ,विधि ब्यवस्था का संधारण कर रहे है ,लोगों को भी हमलोग विश्वास में ला रहे है ,चूँकि वहां लोगों की संख्या ज्यादा है बिना उनको विश्वास में लिए हुए कोई करवाई उचित नहीं है ,इसलिए हमलोग काम कर रहे है ,उनकी आस्था है वो बीच बीच में समाधि में जाते है ,इस कारन वो समाधि में गए है ,जाने के पहले वो खबर नहीं किये थे ,उसके बाद जब हमलोग गए कि उनको समाधि से निकाला जाये ,चूँकि भीड़ भाड़ है ,धार्मिक आस्था है ,विधि ब्यवस्था है ,सारी चीजों पर हमलोग नजर बनाये हुए है।
वही समाधी स्थल पर लोगों की भीड़ उमड़ रही है ,श्रद्धालु ग्रामीण कुसुम बताती है की बारह साल से वो कही कहीं थोड़ा दूध लेते थे ,उनकी भावना थी हम विष्णु भगवान का यज्ञ करेंगे ,वो बारह साल से अन्न नहीं खा रहे है ,वो हमलोगों के ग्रामीण भी नहीं है फिर भी हमलोगों के प्रति इतनी श्रद्धा विश्वास है की हमारे नाथ बाबा मंदिर पर 3-4 महीना से रह रहे है ,वो तो भगवान जैसा काम कर रहे है ,उनमे भगवान वाला करामात है ,हमलोगों का मन नहीं था वो अंदर जाये लेकिन उनकी भक्ति है ,वो बाहर आकर कलश स्थापना करेंगे।

समाधि स्थल पर उमड़ी भक्तों की भीड़
समाधि स्थल पर उमड़ी भक्तों की भीड़

उनके एक और भक्त श्यामल गुप्ता इन्हे विष्णु भगवान का अवतार मानते है और कहते है बारह साल से कुछ नहीं खाते है ,सभी धर्मस्थलों पर ये घूमकर आशीर्वाद लिए है ,इनका मन था हम इस जगह पर विष्णु यज्ञ करेंगे ,वो बोलते नहीं है और ना ही खाना भी खाततेहै ,इशारों इशारों में ये यज्ञ हो रहा है ,इनको हमलोग भगवान मानकर पूजा करते है ,विष्णु भगवान का अवतार मानते है इन्हे ,समाधि इसलिए लिए है कि लोगों का जनकल्याण हो।अब भी प्रतिदिन हजारों लोग समाधि स्थल पर पहुंच रहे हैं, लेकिन जो भी हो कोशी का यह ईलाका आस्था,अंधविश्वास,गरीबी,भुखमरी,बेबसी से हमेशा ही जूझता रहा है ,ऐसे मे यह भक्ति है या अंधविश्वास ….