हम किसी से कम नहीं !

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परीक्षा केंद्र से बाहर निकलता छात्र
परीक्षा देता छात्र
परीक्षा देता छात्र

सहरसा। मन में अगर दृढ इच्छा शक्ति हो तो कोई भी कार्य मुश्किल नहीं है। चाहे वह पढाई का हो या फिर परीक्षा देने का। मोहम्मद मुन्ना इसका नायाब उदाहरण है जो पैर से चलने में असमर्थ होने के बाद भी घर से दस किलोमीटर दूर जाकर इंटर का इम्तिहान दे रहा है। अपने साथियों के साथ वह बैजनाथपुर से टेम्पो पकड़कर सहरसा बस स्टैंड उतरता है और वहां से वह हाथ के सहारे चलकर जिला गर्ल्स हाई स्कूल परीक्षा केंद्र पहुचता है। तीन घंटे तक परीक्षा देने के बाद फिर हाथ के सहारे वह बस स्टैंड पहुँच जाता है। हाथ में छाले नहीं परे इसके चलते मुन्ना पैर में पहनने वाला चप्पल हाथ में पहन लेता है। केंद्राधिक्षाक उषा कुमारी ने बताया की मुन्ना का परीक्षा के प्रति जूनून दूसरों के लिए प्रेरणादायक साबित हो सकता है। उसकी परीक्षा के प्रति जूनून को देखकर उसके साथी सहित परीक्षा केंद्र के वीक्षक तक हतप्रभ हैं। पेशे से मजदूरी करने वाले मुन्ना के पिता मोहम्मद याकूब बताते है की एक विकलांग रिक्शा था भी लेकिन वह दो साल पहले ख़राब हो गया । अल्पसंख्यक छात्र मुन्ना उस समय एक विकलांग रिक्शा सहित अन्य सरकारी अनुदानों से वंचित है जब राज्य के अल्पसंख्यक मंत्री अब्दुल गफूर भी सहरसा जिले से है और पिछले दिनों समाहरणालय सभागार में अल्पसंख्यक छात्र छात्राओं के बीच थोक भाव में अनुदान वितरित किये थे। मगर शायद पुरे जिले के लिए प्रेरणास्रोत बना मोहम्मद मुन्ना पर गफूर साहब की नजर नहीं पर सकी है। उत्क्रमित मध्य विद्यालय खजुरी से मैट्रिक का छात्र मोहम्मद मुन्ना ने बताया की विकलांग रिक्शा ख़राब होने के बाद फिर कही से कोई मदद तक करने वाला नहीं है। फिलहाल वह डी. एल. कॉलेज बैजनाथपुर में इंटर की पढाई कर रहा था। शारीरिक रूप से असमर्थ होने के बावजूद पढ़ाई के प्रति इतनी लगन का कारण मोहम्मद मुन्ना ने यह बताया की कम से कम इंटर पास करने के बाद कही किसी तरह का रोजगार मिल जाये ताकि बुढ़ापे में पिता का सहारा बन सके। परीक्षा के अंतिम दिन मुन्ना के साथ उसके पिता याकूब भी थे जो इस बात को लेकर हैरान थे कि सरकार अल्पसंख्यकों के ढेर काम करने का वादा करती है लेकिन उसके विकलांग बेटे को कुछ नहीं मिल सका है।

हाथों के सहारे चलता छात्र
हाथों के सहारे चलता छात्र