डॉक्टरों की हड़ताल ने ली एक बच्चे की जान, स्वास्थ्य सुबिधा चरमराई !

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डॉक्टरो से वार्ता करते जिला प्रशासन के पधाधिकारी

सहरसा- हथियार के लाइसेंस और सुरक्षा की मांग को लेकर रविवार की मध्य रात्रि से निजी डॉक्टरों के हड़ताल पर चले जाने के चलते एक बच्चे की जान चली गयी। जिस बच्चे की जान गयी उसकी दो बहनों का सदर अस्पताल में इलाज चल रहा है। सिविल सर्जन अशोक कुमार सिंह ने माना की अगर निजी डॉक्टर हड़ताल पर नहीं रहते तो मधेपुरा जिले के बरहरी मानपुर निवासी सुभाष पासवान और फूलो देवी की छह माह का बेटा कृष्णा कुमार दम नहीं तोड़ता।
सुभाष पासवान ने बताया की उसकी पत्नी को तीनों बच्चे एक साथ ही पटना में ऑपरेशन कराकर हुआ था। मृतक बच्चे के पिता सुभाष ने बताया की वह अपने ससुराल गम्हरिया थाना के टेढ़ी मे परिवार के साथ इसी बीच रविवार की रात तीनों बच्चे(छः माह ) की तबियत अचानक से बिगड़ गयी। आनन-फानन में पहले सुपौल के डा० अजीत कुमार के पास गया। उसने सहरसा रेफर कर दिया। सहरसा आने के बाद सबसे पहले डा० बिजेंद्र देव के यहाँ गया तो वहा कहा कि यहां इलाज नहीं होगा क्योंकि डा० साहब हड़ताल पर है। फिर सूर्या नर्सिंग होम गया और काफी आरजू मिन्नत की लेकिन वहां भी हड़ताल को लेकर इलाज से इन्कार कर दिया। अंत में सदर अस्पताल पहुंचा। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी क्योंकि कृष्णा सदा के लिए आँख बंद कर लिया था। सुभाष पासवान ने बताया की दोनों बेटी जुली और डोली को इमरजेंसी में भर्ती कराकर इलाज कराया जा रहा है। कृष्णा की माँ फूलो देवी का हाल बेहाल है। दहाड़ मारती फूलो ने हड़ताली डॉक्टरों को खूब कोसा। सुभाष ने कहा बेटा तो चला गया अब दोनों बेटी बच जाये यही भगवान से विनती है। सुभाष की पत्नी का बच्चे के जन्म के समय ही परिवार नियोजन का ऑपरेशन करा दिया गया था।

विरोध जताते चिकित्सक (file फोटो )
विरोध जताते चिकित्सक (file फोटो )

अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चिकित्सकों के जाने से मचा कोहराम …….

डॉक्टरो से के अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने से पुरे जिले में स्वास्थ्य सेवा चरमरा गई है | हड़ताल के कारण सभी निजी नर्सिंग होम बंद रहे | इस हड़ताल के कारण जिले में हाहाकार मच गई है,बीती आधी रात से पुर्व घोषित हड़ताल के कारण सुबह से सदर अस्पताल पूरी तरह से खाली रहा ,हालाकि सहरसा सिविल सर्जन डॉ० अशोक कुमार सिंह के आग्रह पर आई०एम०ए सदर अस्पताल की आपातकालीन सेवा को हड़ताल से अलग रखने को तैयार हो गए | इमरजेंसी सेवा शुरु होते ही मरीजों की लम्बी कतारे लग गई | निजी क्लीनिको में पहले से ईलाज करा रहे मरीज भी सदर अस्पताल आकर अपना ईलाज करा रहे है | हालाकि इमरजेंसी वार्ड  में महज एक ही चिकित्सक नज़र आए,हालाकि सिविल सर्जन डॉ० अशोक कुमार सिंह खुद सदर अस्पताल में रह कर नज़र रखे हुए है | सदर अस्पताल का आउटडोर बंद रहने से जिले भर से आए मरीजों को काफी कठिनाईयों का सामना करना पड़ा | सौरबाज़ार से आई बुधनी देवी ने बताई की सुबह ही ईलाज करबाने घर से आए थे ,अस्पताल पहुँच कर पता चला की डॉक्टर सब हड़ताल पर चले गए है,अब बिना दिखाए घर जा रहे है |

जिलाधिकारी से वार्ता करते डॉक्टर
जिलाधिकारी से वार्ता करते डॉक्टर (फोटो-फाइल)

                     डॉक्टरों और जिला प्रशासन के बीच वार्ता विफल 

चिकित्सकों के पुर्व घोषित अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने से रेडक्रॉस भवन में डॉक्टर और जिला प्रशासन के पदाधिकारीयों के बीच घंटो चली बैठक में  हड़ताल को समाप्त करने की कोशिश की गई पर यह विफल रहा,इस बैठक में आई०एम०ए के सचिव डॉ० गणेश कुमार,डॉ० गोपाल शरण सिंह,डॉ० आई०डी सिंह,डॉ० एस०के आज़ाद, डॉ० पी भाष्कर सहित आई०एम०ए के सदस्य चिकित्सक के अलावे जिला प्रशासन की और से सदर अनुमंडल पदाधिकारी जहाँगीर आलम,सदर एसडीपीओ सुबोध कुमार विशवास तथा सदर थानाध्यक्ष संजय कुमार सिंह मौजूद थे |