यह कैसा विसर्जन, ये कैसी पूजा !

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सहरसा- बिगत दो दिनों दे सरस्वती माँ की प्रतिमा का विसर्जन हो रहा है,शिक्षा के मंदिर से निकले विसर्जन जुलूसों में तो विसर्जन की सभ्यता,संस्कृति कुछ हद तक तो देखने को मिला,पर शहर के युवाओ द्दारा किए गये सरस्वती पूजा पंडालो या मूर्ति विसर्जन शोभा यात्रा में सरस्वती मां से सबंधित नारे (जो हम या आप बचपन में) लगाते थे कि सरस्वती माता-विद्या दाता,आदि जैसे नारे अब तो लगभग गायब ही हो चुके हैं.
बिहार में किसी भी पूजा और मूर्ति विसर्जन बहुत धूम धाम से होती है।बिहार सहित पुरे सूबे की गलियों ,स्कूलों,शिक्षण संस्थानों में विधा की देवी सरस्वती की स्थापना की जाती है।पूजा पंडालो सहित मूर्तियों के साज-सज्जा पर विशेष ध्यान रखते हुए काफी खर्च भी किया जाता है। बड़ी श्रद्धा से उनकी पूजा-अर्चना की जाती है। पूजा को लेकर खास कर स्चूली बच्चों में काफी उत्साह बना रहता है,पूजा को लेकर पूरी गली-मोहल्ले का माहौल एकदम बदल जाता है|
अब बात करते है प्रतिमा विसर्जन की जो आपने भी देखा और हमने भी देखा….
रविवार के दिन भर और सोमबार को  विधा की देवी माँ सरस्वती का विसर्जन किया गया अलग-अलग युवा क्लबो द्दारा ठेला,ट्रेक्टरो सहित अन्य माध्यमो से माँ की प्रतिमा के साथ-साथ तेज़ साउंड वाले स्पीकर और म्यूज़िक सिस्टम (डी०जे सिस्टम) लगा कर विसर्जन जुलुस निकालते हुए बहरा कर देने वाली कान-फाडू ध्वनि…. बगल से गुजरने पर मानो भूकम्प का आहसास करा रहा हो,ट्रेक्टरो,ठेलों के पीछे ढेर सारे युवा नाचते हुए एक दूसरे पर गुलाल डालते हुए आगे बढ़ते जा रहे थे… कुछ युवक मूर्ति को पकडे हुए भी दीखे | विसर्जन जुलुस में कोई भी युवा सरस्वती माता-विद्या दाता या अन्य नारे का उद्घोष नहीं कर रहा था बल्कि सब गानों पर बेसुध होकर डी०जे कि धुन में हिंदी व भोजपुरी गानों पर भोग-विलासता के मद में चूर होकर नाचने में मशगुल थे…एक-एक गाना जैसे सिर्फ मूर्ति विसर्जन के लिए चुन-चुनकर रखा था और जिसे बजाया जा रहा था…हिंदी फिल्मो सहित भोजपुरी फिल्मो के आइटम नंबर हो सकते हैं सारे ही सरस्वती विसर्जन के दौरान बज रहे थे, जड़ा उन गानों की बोल जो याद रह सका उनमे से कुछ है …मुन्नी बदनाम हुई… ,पिंकी तो है दिलवालों की…, टिंकु जिया….,नागिन डांस…..,शिला की जवानी…. सहित भोजपुरी जगत के गरम लागे चोली…,घाघरा में बम….,खटिया बिछा के ….,लहंगा में होता आहू …करुआ तेल…और पता नहीं क्या क्या क्या गाने बज रहे थे जो अपने इलाके में कम ही सुनने को मिलते है।ऐसे पावन मौके पर ये गाने फूहड़ और अश्लील लग रहे थे। यहां तक कि जो लोग नाच रहे थे ..वो नशे में थे… और शराब के नशे में वो जो हरकतें कर रहे थे वो शर्मिंदा कर देने वाली थीं। ऐसा लग रहा था जैसे कोई बारात जा रही हो..। हालाकि कुछ क्लबो के युवा शांत तरीके से मूर्ति विसर्जन करते हुए भी देखे |
आज हमारे समाज में धार्मिक भावनाओं को कुछ असमाजिक तत्व ने पूजा और विसर्जन को मज़ाक बना कर रख दिया है।
आज के समय में भक्ति में भी मस्ती करने से पीछे नहीं हटती है युवा पीढ़ी । धार्मिक भावनाओं का मज़ाक बन गया ये विसर्जन। हालाकि की पुलिस की चाक-चोबंद व्यवस्था के कारण किसी भी तरह की अप्रिय घटना नहीं घटी और जिले भर में शांति-पूरक सरस्वती पूजा संपन्न हुआ | पूजा सहित विसर्जन को लेकर हर जगह काफी तादाद में पुलिस बल को तैनात किया गया था |