स्थापना काल के बाद भी नही चालु हो सका बैजनाथपुर पेपर मिल

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बैजनाथपुर पेपर मिल ,जंग लगी मशीने

सहरसा-मधेपुरा मुख्य सड़क के किनारे बैजनाथपुर हो या सहरसा रेलवे स्टेशन के करीब बंगाली बाज़ार ओवर ब्रिज सिर्फ वादों की दो-दो घुट पी कर सहरसा वासी रह रहे है,पहले बात करते है पेपर मिल की….आज से करीब 40 साल पहले कागज मिल स्थापित किया गया था. तब से अब तक यह मिल धुआ तो नहीं निकाल सका पर लोकसभा हो या विधानसभा चुनाव का चुनावी मुद्दा जरुर बनता रहा है. लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला.मिल की मशीनें जंग खाकर बरबाद हो रही हैं. बार-बार मिलने वाले आश्वासन की दवा ने लोगों में कभी क्षोभ तो कभी निराशा के भाव पैदा कर दिया है.सहरसा वासियों को सिर्फ आश्वासन के अब तक कुछ नहीं मिल पाया है,मिल के कर्मियों की उम्मीदें खत्म हो चुकी हैं. उन्हें कुछ सूझ नहीं रहा है कि वे क्या करें और कहां जायें.
वर्ष1975 में पेपर मिल की स्थापना से लोगो में उम्मीद जगी थी की यह मिल कोसी के विकास और युवाओं को रोजगार से जोड़ने का सपना लिये इस मिल की नीव रखी गयी थी.जिला मुख्यालय से महज पांच किलोमीटर दूर सहरसा-मधेपुरा मुख्य सड़क के किनारे बैजनाथपुर पेपर मिल स्थापना की कवायद शुरु हुआ था. करीब 48 एकड़ भूमि अधिग्रहण कर बिहार सरकार ने इसे चलाने के लिए निजी और सरकारी सहयोग से बिहार पेपर मिल्स लिमिटेड कंपनी का गठन किया था. इसी कंपनी की देखरेख में मिल स्थापित करने का काम शुरू हुआ था.
लेकिन 1978 में निजी उद्यमियों से करार खत्म होने के कारण काम रूक गया. तत्कालीन सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के अंतर्गत परियोजना को चलाने का निर्णय लिया. जिसके बाद बैजनाथपुर पेपर मिल बिहार राज्य औद्योगिक विकास निगम के स्वामित्व में आ गयी. बिहार सरकार और निगम की आपसी सहमति के बाद विदेश से एक पुरानी मशीन भी खरीदी गयी. 1987 में निगम ने कार्य स्थल को अगले दो साल में तैयार कर देने का लक्ष्य निर्धारित रखा.
लेकिन जरूरत के हिसाब से पैसा नहीं मिलने से यह पूरी परियोजना ठप हो गयी. 1996-97 में बैंक ऑफ इंडिया ने 7 करोड़ 40 लाख दिये तो मिल का काम फिर से शुरू हुआ. पर इन पैसों से मिल का 80 प्रतिशत काम ही हो पाया.
वर्ष 2012 में सूबे की तत्कालीन उद्योग मंत्री ने पेपर मिल के निरीक्षण के दौरान बताया गया था कि लगभग दस करोड़ रुपये के वर्किंग कैपिटल से इसे चालू किया जा सकता है.
अब तक जो खर्च हो चुका है , उसमें निगम के 7 करोड़ 78 लाख और बैंक के 6.72 करोड़ रुपये शामिल हैं. अभी मिल को निर्माण क्षेत्र में लगभग 6 करोड़ और वर्किग क्षेत्र में लगभग 4.67 करोड़ रुपये की आवश्यकता होगी. कुल 14.50 करोड़ राशी खर्च के बाद भी पेपर मिल उद्धारक की बाट जो रहा है,