वादों की दो घुट दवा में चार दफे शिलान्यास के बाद भी नहीं बन सका रेल ओवरब्रिज

1118
शिलान्यास करते रेल राज्यमंत्री अधीर रंजन चौधरी ,तत्कालीन सांसद शरद यादव,दिनेश चंद्र यादव सहित अन्य

सहरसा– बंगाली बाजार रेलवे ढाला पर ओवरब्रिज नहीं होने की वजह यहाँ कभी जाम तो कभी महाजाम के संकट से शहरवासियों को जूझना पड़ता है। इस जाम की संकट में अबतक कईयों की जानें भी जा चुकी है। हालांकि एनएच 107 अवस्थित बंगाली बाजार रेलवे ढाला पर ओवरब्रिज निर्माण के लिए 1997-98 के रेल बजट में ही स्वीकृति मिली। स्वीकृति के 17 साल के दरमियान केंद्र की विभिन्न सरकारों के रेल मंत्रियों द्दारा चार-चार बार शिलान्यास भी किया जा चुका है। इस ओवरब्रिज निर्माण में कभी राजनीति तो कभी डिजाईन रोड़ा बना रहा है |
रेलवे ओवर ब्रिज निर्माण नहीं होने से सम्पूर्ण शहर में जाम की समस्या विकराल हो गयी है। स्कूल जाने से लेकर कोर्ट-कचहरी व अस्पताल जाने वालों को भी जाम से जूझना पड़ता है। इस समस्या को लेकर विभिन्न सामाजिक व राजनीतिक संगठन के लोग समय-समय पर आंदोलन करते रहे रहे है| इसके बाद भी अब तक साकारात्मक लाभ नहीं मिल पायी है। रेल चक्का जाम से लेकर कई बार बाजार भी बंद रहा है।खास बात यह भी है कि स्वीकृति के 17 साल बाद भी रेल ओवर ब्रिज का निर्माण तो नहीं हो सका, जिला पार्षद प्रवीण आनंद के नेतृत्व में रेल ओवर ब्रिज निर्माण संघर्ष समिति के बैनर तले पिछले तीन-चार सालो से अनवरत आंदोलन किया गया जा रहा है,आंदोलन का ही नतीजा रहा था की तत्कालीन सांसद शरद यादव व जिला प्रशासन ने किसी तरह एक बार फिर से शिलान्यास करने की नौबत पैदा कर दिया। लेकिन बिफर वही रही जहां से कहानी शुरू हुई खत्म भी वहीं से हुई। हालांकि 90 के दशक से ही इस ओवर ब्रिज के निर्माण के आंदोलन होती रही है।लेकिन अभी के समय में कई संगठनों के अलावे आंदोलन का शंखनाद जिला पार्षद प्रवीण आनंद अन्य के हाथों ओवर ब्रिज निर्माण संघर्ष समिति के रूप में चल रहा है। समय-समय पर इनका आंदोलन और उनकी चट्टानी ताकत रेल प्रशासन व जिला प्रशासन को सोचने पर मजबूर कर दे रहा है। इन लोगों को भी सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव पर भरोसा है कि वे अपनी कौशल व ताकत का उपयोग करते हुए रेल मंत्रालय को त्वरित गति से ओवर ब्रिज निर्माण की दिशा में पहल करेंगे।
हालांकि कभी सहरसा के सांसद रह चुके खगडि़या के पूर्व सांसद दिनेशचन्द्र यादव ने स्थानीय होने के नाते इस मुद्दे को न केवल संसद में उठाया बल्कि रेल मंत्रालय व विभागीय अधिकारियों से व्यक्तिगत मिलकर भी इस दिशा में काफी प्रयास किये। खगडि़या के सांसद रहते हुए श्री यादव ने 7 जुलाई 2009 एवं 14 मार्च 2012 को लोकसभा के पटल पर इस मुद्दे को रखते हुए कहा कि वर्ष 1997-98 के रेल ओवर ब्रिज ;आर.ओ.बीद्ध निर्माण की स्वीकृति रेल बजट में हुई थी। जबकि सहरसा प्रमंडलीय मुख्यालय है और बढती आबादी के साथ गाडि़यों की संख्या में आए-दिन अनवरत बढ़ने से उक्त रेलवे ढ़ाला बंद रहने से दोनों तरफ सैकड़ों की संख्या में ट्रक, बस, मैक्सी, टैक्सी, टैम्पू, रिक्शा, ठेला व मोटरसाईकिल रोज खड़े हो जाते हैं जिसके चलते जाम लग जाता है। लिहाज, आम लोगों को भारी परेशानी होती है और जनजीवन भी अस्त-व्यस्त हो जाता है
स्वीकृति के करीब 17 वर्ष बाद इस लोकसभा चुनाव से पुर्व तत्कालीन सांसद सह जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव ने 22 फरवरी 2014 को रेल राज्यमंत्री अधीर रंजन चौधरी के हाथों एक बार फिर शिलान्यास करवाया। जबकि इससे पूर्व रेलमंत्री रामविलास पासवान, पूर्व रेल राज्यमंत्री स्व.दिग्विजय सिंह, पूर्व रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव ने भी शिलान्यास कर चुके हैं। अब आम-जनमानस की नजरे स्थानीय  सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव पर टिकी है,
रेल राज्यमंत्री श्री चौधरी के शिलान्यास के बाद आरओबी निर्माण की प्राथमिक प्रक्रिया को पूरा करते हुए विशेषज्ञों की टीम ने मिट्टी जांच भी शुरू किया। कुछ दिनों के बाद मिट्टी जांच भी स्थगित हो गयी|अब देखना है की सहरसा के लोगो के चिर-परिचत रेल ओवरब्रिज अच्छे दिन के सरकार में सहरसा के लिए अच्छे दिन ला पाते है या फिर यह सरकार भी आश्वासन की दबा पिलाती है|