शोक सभा आयोजित,उमड़ी भीड़

1012

सहरसा -पुर्व सांसद आनंद मोहन के चाचा प्रखर गाँधी वादी व स्वतंत्रता संग्राम के अग्रदूत पदमानंद ब्रहमचारी जी का सोमबार को निधन हो गया | उनके निधन से पंचगछिया गाँव सहित सहरसा व बिहार में शोक की लहर फ़ैल गयी हैं |कोसी के गांधी रामबहादुर सिंह के ज्येष्ठ पुत्र जिले के पंचगछिया गाँव के प्रखर स्वतंत्रता सेनानी पद्मानंद सिंह उर्फ़ ब्रह्माचारी का सोमवार को निधन हो गया। स्वतंत्रता आंदोलन में उनकी बड़ी भूमिका रही। बाद में उन्होंने गांधीवाद को अपनाया। पूर्व सांसद आनंद मोहन के बड़े चाचा ब्रह्माचारी जी के प्रयास से ही पंचगछिया में पंचायत चुनाव के निर्विरोध निर्वाचन की प्रक्रिया प्रारंभ हुई थी | आज मंगलवार को उनका पार्थिव शरीर गंगजला स्थित पुर्व सांसद आनंद मोहन जी के कार्यालय लाया गया जंहा शोक सभा में शहर के नेता,समाजसेवी,व्याव्स्यी,पुर्व विधायक सहित अन्य ने उन्हें अंतिम विदाई देते हुए श्रद्धा सुमन अर्पित किया,ब्रह्माचारी जी के पार्थिव शरीर सहरसा पहुचे ही सहरसा सहित आस-पास के लोगो का सहरसा सहित पंचगछिया में जमघट लगा रहा है और लोगो का आने का सिलसिला जारी है | शोक सभा में पुर्व सांसद लवली आनंद,भा०जा०पा० के प्रदेश अध्यक्ष डॉ ०रामनरेश सिंह,हम के छात्र युवा राष्ट्रिय अध्यक्ष चेतन आनंद,खादी भंडार के मंत्री नकुल कुमार सिंह,अध्यक्ष सुमन कुमार,पुर्व विधायक संजीव झा,गुंजेश्वर साह,किशोर कुमार मुन्ना,आलोक रंजन,सीपीआई सचिव ओमप्रकाश नारायण,रमेश सिंह,पुर्व एमएलसी इसराइल राईन,सरिता पासवान,प्रमुख पूनम सिंह,मुख्या रोशन सिंह,प्रो० एह्साम शाम.प्रो० एस०पी सिंह,पुर्व मुख्या अजय सिंह,त्रिवेणी सिंह,वार्ड पर्षद ध्यानी यादव,राजन आनंद,पुर्व प्रमुख सियाराम सिंह,हिरा सिंह,फ्रेंड्स ऑफ आनंद के अनीता कुशवाहा,रतन कुमार सिंह,सागर झा,अवनीस कुमार,बाबुल झा,सागर झा,डिग्री सिंह,संतोष यादव,सत्यप्रकाश,अजय झा,सरोज सिंह,लुकमान अली सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे | उनकी मौत से मर्माहत सहरसा जेल में बंद पुर्व सांसद अनद मोहन ने उनकी याद में स्वातंत्र्य समर के विप्लवी युवा सेनानी बुजुर्ग गाँधीवादी बड़े बाबूजी को….. याद करते हुए स्मरण मात्र में कविता के माध्यम से उन्हें याद करते हुए…………………………..

पंचगछिया के “कीर्तिपूत”

सन बयालीस के क्रांतिदूत

तू गाँधीवादी “शांतिदूत”

साहस, धीरज तुझमें अकूत

“कोशी गाँधी” के ज्येष्ठसूत

अभिमान, अहं से तू अछूत

तूने ही सिखाया स्वाभिमान

तेरा जीवन है, निरभिमान

यह गाँव है तेरा हैं आभारी

हे पदमानंद “ब्रहम्चारी”

चरणों में तेरे समर्पण

तेरा ही हैं तुझको अर्पण |