तीसरे मैच में भी भारतीय टीम को मिली हार

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कुल मैच -05 ,इंडिया-0 ,ऑस्ट्रेलिया-3

ऑस्ट्रेलिया ने एक बार फिर टीम इंडिया को करारी मात दी। इस जीत के साथ ही ऑस्ट्रेलिया ने पांच मैचों की वनडे सीरीज में 3-0 से बढ़त बना ली कर सीरिज पर अपना कब्ज़ा जमा चुकी है टीम इंडिया के फैन को एक बार फिर निराश हाथ लगी |
खेल के क्षेत्र से जुड़े रौशन सिंह धोनी कहते है की अब तक के सभी मैचों में विकेट सपाट रहा है , लेकिन भारत में भी वनडे में हम ऐसे ही विकेट पर खेलते हैं। ऐसे में हमें सपाट विकेट पर विकटे-टू-विकेट की रणनीति पर बॉलिंग करनी चाहिए थी, जबकि हमारे गेंदबाजों ने हर कहीं गेंदें फेंकी। इसका नतीजा यह रहा कि ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका मिल गया और हमारे हिस्से में एक और हार आ गई। 77 वनडे खेलकर 107 विकेट अपने नाम कर चुके सीनियर गेंदबाज ईशांत शर्मा भी लाइन लेंथ को तरसते दिखे। न केवल मेलबर्न बल्कि ब्रिस्बेन में भी उनका यही हाल था। उमेश यादव ने विकेट जरूर लिया, लेकिन उनकी भी दिशा सही नहीं थी। कम से कम इस गेंदबाजी यूनिट से तो हमें जीत दिलाने की आस छोड़ ही देनी चाहिए।
मेलबर्न में तीन भारतीय बल्लेबाज स्कोर करने में सफल रहे। यदि आप उनके रन देखेंगे, तो आपको लगेगा कि उन्होंने गजब की बैटिंग की है, लेकिन जैसे ही आप उनके स्ट्राइक रेट पर नजर दौड़ाएंगे, तो आपको लगेगा कि जैसे हम मॉडर्न क्रिकेट खेल ही नहीं रहे हैं। विराट कोहली ने शतक जरूर बनाया, लेकिन उन्होंने 117 रन बनाने के लिए 117 गेंदें खेलीं। उनके स्तर के बल्लेबाज का स्ट्राइक रेट 100 से अधिक होने की आशा की जाती है। अजिंक्य रहाणे ने 50 रन बनाने के लिए 55 गेंदें खेलीं, वहीं अपनी ससुराल के मैदान पर खेले शिखर धवन का तो और बुरा हाल रहा। धवन ने 68 रन बनाने के लिए 91 गेंदें खेल डालीं।
अब इस बीच यदि आप न्यूजीलैंड और पाकिस्तान के बीच रविवार को हुए मैच या हाल ही में हुए उनके अन्य मैचों पर नजर डालेंगे, तो आपको लगेगा कि जैसे हमारे बल्लेबाज टेस्ट मैच खेल रहे थे। इस मैच में मार्टिन गप्टिल ने 58 गेंदों में 87 रन और केन विलियम्सन ने 48 गेंदों में 72 रन ठोके और टीम को 10 विकेट से जीत दिला दी। माना कि यह टी-20 मैच था, लेकिन वनडे के आखिरी ओवरों में भी टी-20 की तरह ही बल्लेबाजी करनी होती है, खासतौर से जब विकेट हाथ में हों। गौरतलब है कि 40 ओवर तक टीम इंडिया के 207 रन पर दो विकेट ही गिरे थे, जबकि 30 ओवर तक हमने दो विकेट पर 147 रन बनाए थे। इस प्रकार 30-40 ओवर के बीच में हमने बिना विकेट खोए महज 60 बनाए, अन्यथा हम 300 से अधिक का लक्ष्य खड़ा कर लेते।

साभार -स्पोर्ट्स