सहरसा के लिए नासुर बना बंगाली बाज़ार रेलबे ढाला

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सहरसा की आम जनमानस की चिर परिचित मांग बंगाली बाज़ार रेलवे ढाला पर एक अदद ओवर ब्रिज है,इस ढाला पर हर रोज घंटो लोगो को जाम में फंसना नियति बन गया है,गंगजला चौक हो या थाना चौक। शंकर चौक की बात कहिए या महावीर चौक। जिस तरफ निकल जाइए जाम ही जाम। किसी आवश्यक काम से निकले तो भी जाम, शहर में घूमने जाएं तो जाम। इस जाम से समाज का हर वर्ग प्रभावित है। खासकर स्कूली बच्चे व कालेज जाने वाली छात्राओं को यह जाम काफी परेशान करता है। जाम के बहाने मनचलों की गंदी फब्तियां झेलती लड़कियां जाम के साथ उन चेहरों को भी कोसती है जो इसके लिए जिम्मेदार हैं। आंदोलन के दौरान शहर लोगों के लिए नरक बन जाता है। समयसमय पर होते इन आंदोलनों के कारण आम लोग खासे परेशान होते हैं।
चार दफे शिलान्यास होने के बाद भी नहीं शुरू हुआ काम 
सहरसा के बंगाली बाजार में ओवरब्रिज के निर्माण कार्य का शिलान्यास चौथी बार 22 फरवरी को किया गया था। किंतु, पर्याप्त आवंटन के बिना 1 वर्ष से अधिक होने के बाद भी काम शुरू नहीं हो पाया है। 
लोगों का कहना है लोकसभा चुनाव से ठीक पहले पुल निर्माण कार्य का शिलान्यास कर श्रेय लेने की होड़ मची थी। किंतु, शिलान्यास के बाद काम शुरू कराने के लिए पहल नहीं हो रही है। ज्ञात हो कि इस ओवर ब्रिज का निर्माण रेलवे एवं बिहार सरकार के द्वारा 50-50 प्रतिशत कास्ट शेयरिंग के आधार पर होना है। रेल सूत्रों की मानें तो कार्य को शुरू करने से कई प्रक्रिया पूरी करनी है। 
जानकारी के अनुसार बंगाली बाजार में ओवरब्रिज निर्माण कार्य का शिलान्यास वर्ष 1996 से लेकर 2014 तक में चार बार हो चुका है। अंतिम बार 22 फरवरी 2014 को 57.64 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली रेल ओवरब्रिज के निर्माण कार्य का शिलान्यास पूर्व रेल राज्यमंत्री अधीर रंजन चौधरी एवं जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव ने संयुक्त रूप से किया था। शिलान्यास के साथ ओवर ब्रिज के निर्माण के लिए मिट्टी अन्वेषण का काम शुरू होने से निर्माण की उम्मीद जगी। परंतु, फिलहाल कोई काम नहीं हो रहा है। ओर सिर्फ सहरसा के आम-आवाम को पुर्व मध्य रेलवे का लगा बोर्ड मुँह चिढ़ा रहा है |