नवाब के शहरों में है मूलभूत समस्याओ का अभाव

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राजनीती के दो कद्दावर नेता का गढ़ सिमरी बख्तियारपुर अनुमंडल में प्रखंड मुख्यालय जैसी भी सुविधा नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों की बात तो दूर नगर पंचायत सिमरी में भी शुद्ध पेयजल की व्यवस्था नहीं हो पाई है। 1992 से आज तक गोदाम में अनुमंडल कार्यालय चल रहा है। सिमरी को अनुमंडल बनाने के बाद यहां लोगों की आवाजाही बढ़ी है। जाम की समस्या गंभीर बनी है। शहर की सड़कें पगडंडी जैसी है। अतिक्रमण बड़ी समस्या है।

स्टेशन तक जाने के लिए घंटों लोगों को जाम का सामना करना पड़ता है। अनुमंडल की अधिकांश सड़कों का पक्कीकरण नहीं हुआ है। तटबंध के अंदर कच्ची सड़क भी नसीब नहीं है। सतरस पुल टूट चुका है। अभी तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ। हजारों की आबादी को कई किलोमीटर अधिक सफर कर अनुमंडल कार्यालय पहुंचना पड़ता है। कोसी बांध से जोड़ने वाली सड़कों का निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ है। ऐतिहासिक शिव मंदिर मटेश्वर धाम का विकास कार्य अधूरा है। सोनवर्षा राज-सिमरी बख्तियारपुर-बलवाहाट-सहरसा एनएच निर्माण कार्य वर्षों से अधूरा है। अनुमंडल मुख्यालय होने के बावजूद सिमरी अस्पताल में 6 बेड के अस्पताल को अपग्रेड नाम मात्र किया गया है। कहने के लिए अनुमंडल का अस्पताल है, लेकिन पीएचसी जितनी भी नहीं सुविधा है। चपरांव अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में डांक्टर नहीं रहते। बलवाहाट-चपरांव को प्रखंड बनाने की घोषणा कागजों तक सिमट कर रह गई। मुख्य मार्ग पर स्थित स्कूलों में पढ़ाई तो होती है लेकिन तटबंध के अंदर के स्कूलों में शिक्षक जाते ही नहीं हैं। अनुमंडल में लड़कियों की शिक्षा की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। अनुमंडल होने के बावजूद एक भी डिग्री कॉलेज सिमरी बख्तियारपुर में नहीं है। उच्च शिक्षा के लिए छात्रों को बाहर जाना पड़ता है। बख्तियारपुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म का ऊंचीकरण नहीं हुआ। इस कारण यहां बराबर दुर्घटना होती रहती है।

विकास कार्य: गांवों तक संपर्क सड़क बनाई गई है। विद्यालयों को अपग्रेड करने के कारण शिक्षा में सुधार हुआ है। बिजली की स्थिति में सुधरी है। अस्पताल को  बड़ा भवन मिल गया है। रेलवे स्टेशन को अपग्रेड किया जा रहा है|