याद किए गये प्रगतिशील रचनाकार कैफ़ी आज़मी

1189

14 जनवरी 2016 को उर्दू के प्रख्यात प्रगतिशील रचनाकार,कम्युनिस्ट कैफ़ी आज़मी का 97 वां जन्म दिन जहाँ उनके पैतृक गांव मिजवां फूलपुर आजमगढ़ उप्र में मिजवां वेलफेयर सोसायटी और उनकी राह पर चलने वाले कामरेडों द्दारा दिन की शुरुआत में मनाया गया, वहीँ उनके मुम्बई स्थित निवास जानकी कुटीर जुहू में एक सांस्कृतिक संध्या का आयोजन हुआ।
इप्टा के शाहिद सिद्दीकी का कैफ़ी आज़मी के प्रारंभिक जीवन,लखनऊ,कानपूर,मुम्बई कम्यून और कम्युनिस्ट जीवन पर लिखा आलेख सभी ने सुना और सराहा।
कैफ़ी आज़मी जीवन के अंतिम पड़ाव में अपने गांवजवार में रहना पसंद किया और मिजवां के विकास के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ा। कैफ़ी साहब इप्टा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीवन के अंत तक रहे बने रहे |
कार्यक्रम में इप्टा के शाहिद सिद्दीकी,सुलभा आर्य,रमेश तलवार,राकेश वेदी,फराह के अतिरिक्त सतीश कौशिक,कंवलजीत सिंह,अनुराधा पटेल,निर्देशक विजय आचार्य आदि फ़िल्मी हस्तियां मौजूद रहीं।
मिजवां आजमगढ़
(उप्र) में उनके सबसे करीबी कॉमरेड रहे हरिमंदिर पाण्डेय भी इस मौके पर उपस्थित थे।उनके साथ मुम्बई की सामाजिक कार्यकर्त्ता कोलंबा कालीधर भी साथ थीं।सांस्कृतिक संध्या को सफल बनाने में कैफ़ी आज़मी के पुत्र ख्याति प्राप्त सिने छायाकार बाबा आज़मी और उनकी बहू मशहूर सिने नायिका तन्वी आज़मी का प्रमुख योगदान रहा।