जंजीर में कैद जिंदगी

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सहरसा -जिसके कंधे पर पुरे परिवार की जिंदगी चलती थी ,आज उसे उसके ही पिता खुद अपने हाथों से  पैरों में  जंजीर जोड़कर उसे बाँधने को मजबूर है ,मानसिक रूप से बीमार बेटे के इलाज के लिए अब उमर फारुख के पास पैसे नहीं है, …पहले ही इलाज के लिए घर तक गिरवी रख दी है ,घरवाले दानेदाने को मोहताज है, …अब बेटे को जंजीर में बाँध कर रखने की नौबत आ गयी है ,क्योकि खुले में उसका बीमार बेटा भटक कर इधर उधर चला जाता है और सामने आये ब्यक्ति से मारपीट पर उतारू हो जाता है ,गन्दा पानी पी लेता है स्थिति यह है कि रात में सोते समय भी पिता को बेटे का पेर अपने पैरों से जंजीर में बांध कर रखना परता है वजह रात में निकलकर कुछ हरकत न कर बैठे ….कयाम एक अच्छा डायनमो मैकेनिक था ,इसकी मार्केट में डिमांड थी ,घर भी मोटरसायकिल से आया जाया करता था ,घर के सारे खर्च की जिम्मेवारी इसी के कंधे पर थी ,लेकिन दो साल पूर्व घर आते वक़्त इसका एक्सीडेंट हो गया और तब से ये इस कदर है ,अब इनके घरवाले को सरकार से मदद की आस है ,क्योकि पिता किसी तरह रिक्शा चलाकर गुजारा कर रहा है
सहरसा बस्ती के रहने वाले मोहम्मद कयाम  लगभग दो साल पहले तक यह अपने माँ,बाप, भाई, बहन का लाडला था ,पुरे परिवार का खर्च वो अपनी मेहनत से जुटा रहा था ,होनहार ये युवक डायनमो का काम खूब अच्छी तरह करता था ,कुल मिलाकर मजे में पुरे परिवार की जिंदगी कट रही थी लेकिन वक़्त की नजर लग गयी इस परिवार को ,एक दिन घर लौटने के क्रम में वो सड़क हादसे का शिकार हो गया, जिससे  उसकी मानसिक स्थिति खराब हो गई ,परिजनों ने इलाज कराने की पूरी कोशिश की लेकिन इलाज के लिए धन नहीं जुट पाया और परिवार की माली हालात बिगड़ती चली गयी।इसके पिता मोहम्मद उमर फारुख अपने परिवार के भरण पोषण और इलाज  के लिए रिक्शा चलाने लगा। पिता मोहम्मद उमर फारुख कहते है डायनमो सेल्फ का काम कर रहा था अच्छा मैकेनिक था ,इसी पर घर चलता था ,इसका एक्सीडेंट हो गया ,इलाज भी करवाए ठीक भी हुआ ,लेकिन फिर ख़राब हो गया कर्ज उठा उठा कर इलाज करवाते है उससे भी ठीक नहीं है ,पैर में बेड़ी लगा कर सोते है इसलिए क्योकि भागे नहीं ,दिन में भी लगा कर रखते है ,किसी को मारे नहीं ,माँ को भी मार बैठता है ,गन्दा पानी पी लेता है ,सरकार का थोड़ा मदद चाहिए ,हम तो लुटे हुए है ,हमारे पास कुछ भी नहीं है ,घर को भी गिरवी लगा दिए है …..
कयाम की नानी और माँ बताती है घर जमीन  बेचकर इसको ठीक कराए भी  फिर भी इसकी तबीयतख़राब हो गया ,लोगों से झगड़ा करता रहता है इसलिए बांध कर रखते है ,इलाज भी करवाए अब पैसा नहीं है क्या करे ,रोटी पर आफत है ,खाना नहीं मिलता तो इलाज कहा से करे ,इसलिए बांध कर रखते है बच्चे की बदौलत दाल रोटी हमलोग खाते थे ,अब सरकार जो करे….