प्रजातंत्र का कत्तल करो

डॉ मनोरंजन झा की रचना

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उस दिन सत्ताधारी दल का
एक MP कह रहे थे
कॉमिशनर को मुअतल करो
क्योंकि उसने
जमीन पर चलने वाली
नाव को रोक दी है
बर्षो से इस अंचल को 
चुसनेवाली
जोक को टोक दी है।
और फिर वह पका बालवाला
सेब और अंगूर की जूस से
लाललाल गालवाला
ना समझी के कुछ गिजगीजी
सुगर के बच्चे को लाकर
कुछ शोर भी मचाया था
खुद किसी की ऊँगली पर नाचनेवाला
मदारी बनकर
कुछ बंदरो को नचाया था ।
मैंने बाबा से पूछा 
MP
साहेब क्या कह रहे है
उत्तर मिला
कह रहे है की प्रजातंत्र का कत्तल करो
कॉमिशनर को मुअत्तल करो ।

डॉ मनोरंजन झा की रचना