टीपू सुल्तान

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हिन्दू था न मुसलमान था
कौम का स्वाभिमान था
खुद में हिंदुस्तान था |
शेरों के लिए सवा शेर था ,
सच,”शेरे मैसूर” था ,
संकीर्णताओं से दूर था ,
वह भारत का नूर था |
फिरंगीयों की चालो को ,
समझा ,सबको समझाया था ,
छक्के ब्रिटिशों के छुड़ाया था ,
आज़ादी का अर्थ बताया था |
जो टुटा ही ,न झुका कभी ,
वह ऐसी तलवार था ,
खुद्दारी और आज़ादी का
जीवित एक विचार था |
बंद करो ,अनर्गल प्रलाप,
वह ब्रिटिशकाल का था “प्रताप

आनंद मोहन ,पुर्व सांसद रचित कविता
( केंद्रीय कारा ,बेऊर )