रंगयोद्धा आर.टी. राजन की मनी तृतीय पुण्य तिथि

शशि सरोजनी रंगमंच सेवा संस्थान ने आयोजित किया स्मृति समारोह...

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जिला परिषद में आयोजित समारोह का उद्घाटन पूर्व सदस्य बिहार, विधान सभा, कार्यकारी अध्यक्ष बिहार प्रलेस, जनशक्ति के संपादक व विद्वान साहित्यकार राजेन्द्र राजन ने दीप प्रज्वलित कर किया…. संस्थान के संरक्षक एवं महाराजा हरिबल्लभ मेमोरियल कॉलेज, सोनवर्षा के प्रधानाचार्य डा. के.एस ओझा के अध्यक्षता में विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ संस्कृतिकर्मी डा. अनिल पतंग, संस्थान के संरक्षक दर्जनों पुस्तकों के रचैता विद्वान साहित्यकार डा. हरिशंकर श्रीवास्तव “शलभ”, साहित्यकार डा. अरविन्द श्रीवास्तव, वरिष्ठ पत्रकार रमन झा, युवा कवि अरुणाभ सौरभ, रंगकर्मी एस.एस. हिमांशु, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय उत्तीर्ण नाट्य निर्देशक मिथिलेश रॉय, वाटिका युवा क्लब के अध्यक्ष अनिल मिश्रा ने समारोह को सम्बोधित करते हुए कहा की रंगकर्मी राजन कोसी क्षेत्र में बतौर हिंदी नाटक के कुशल प्रशिक्षक के रूप में हमेशा प्रदर्शित होते रहे… जहाँ रंगमंच पर आर्थिक तंगी और आधुनिक सुविधाओं का घोर आभाव हुआ करता था बावजूद रंगकर्मी राजन ने इसे समृद्ध व सहज बनाने का कार्य किया जिसे आज शशि सरोजनी रंगमंच सेवा संस्थान प्रत्येक वर्ष उनके पुण्य तिथि पर विराट आयोजन कर उनके कृतित्व को नमन करता है यह संस्थान का सार्थक, प्रशंसनीय और सरहानीय प्रयास है… इस अवसर पर रंगकर्मी कुंदन वर्मा और मानोबेन्द्रो दास के निर्देशन में संस्थान के कलाकार रूबी यादव, मोनी माही, कृति, निशा, साल्वी, नेहा, साक्षी ने “झुमका के संग पिया नथिया दिया दअ…. ” गीत पर लोक नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति से रंग निर्देशक राजन को श्रद्धांजलि दी… वही संस्थान के नए पौध नन्हीं कलाकार अग्रिमा, श्रृष्टि, हर्षिता, विधि, भाग्य श्री, ऋतिका, पलक, अनुष्का, सौम्या, प्रीति, स्नेहा, अनामिका ने पैरों की थाप और घुंघरुओं की झंकार से रंगकर्मी राजन को श्रद्धांजलि देने में पीछे नहीं रही… इससे पूर्व संस्थान के मीडिया प्रभारी साकेत कुमार ने अतिथियों को मिथिला की संस्कृति पाग और चादर से सम्मानित किया तथा गायिका हंसा श्री ने स्वागत गीत से अतिथियों का स्वागत किया… वहीं चन्द्रकिरण रीना ने अपने ग़ज़लों की बेहतरीन प्रस्तुति से राजन को श्रद्धांजलि दी एवं समारोह को यादगार बना दिया… नाल एवं तबला पर क्रमसः मुकेश झा मुन्ना और उदय कुमार ने संगत किया…इस अवसर पर सहरसा जैसे कस्बाई शहर में ठण्ड भरी मौसम के बीच दर्शकों की भारी भीड़ जो पूरे ५ घंटे तक लगातार डटे रहे जिसमें महिलाओं की संख्या भी आधी से थोड़ी ही कम थी ने रंगमंच की मिशालता को दर्शाता है… जबकि फणीश्वर नाथ रेणू द्वारा लिखित एवं शशिकांत प्रसाद निर्देशित भरत नाट्य कला केंद्र, पूर्णिया का नाटक “आदिम रात्रि की महक” को दर्शकों की खूब तालियाँ मिली एवं रंगकर्मियों ने किरदार को वखूबी निभाया… समारोह में कविता पोस्टर प्रदर्शनी आकर्षण का केंद्र रहा… रंगकर्मी कुंदन वर्मा दवरा बनाये गए मंच का आकर्षण कोसी क्षेत्र में रंगमंच की सशक्तता को दर्शाता हुआ उनकी कलात्मक्तता झलक रही थी… कौशल यादव, बंटी, राघब, अमित, ज्योतिष वर्मा, सुमन जयकर, आयुष, पंकज, रतन आदि ने कार्यक्रम को सफल बनाने में अपने-अपने भूमिका में शक्रिय रहे… खाश कर बच्चों के अभिभावकों का हम ह्रदय से शुक्रिया अदा करते है जिन्होंने कार्यक्रम की सफलता के लिए अपना बहुमूल्य समय दिया… सुरक्षा की अच्छी व्यवस्था के लिए जिला प्रशासन का भी बहुत शुक्रिया… साथ ही आयोजन में सहयोग देने के लिए
धन्यबाद दिया |