चोर नज़र आवेला

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( भोजपुरी कविता )
हमरा मनमा में एगो बात आवेला,
ई देश बा स s की कोनो घुड़साल बा s |
जहा चुतर घुमाके चलेला दुलती ,
और निर्दोष घास-फूस रोदावेला |
दोसर के टोपी उछाले में मजा आला ,
अपना जब उछलेला तब आकश तकला |
कोनो बांचे ओकर दोष कोनो बांचे हेकर दोष ,
बाकीर हमार नज़र में दोनों चोर नज़र आबेला |

लेखक/कवि मुक्तेश्वर मुकेश जी की रंग-बदरंग कविता संग्रह का अंश