झुग्गियो में भारत,महलों में इंडिया

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एक दर्द हो तो कहूं यहाँ होता है
मत पूछो कब,क्यों,कहा होता है
इधर पानी आया तो बिजली जाती है
भ्रष्टाचार से संभला तो महगाई आती है,
सडकों के हिचकोलों से जोड़-जोड़ हिलताहै
कतारों में बामुश्किल राशन मिलता है
गाँव का अस्पताल खुद में बीमार है
बेकारी-मुफलिसी से जीना दुष्वार है,
जगह-जगह अतिक्रमण मवेशी खटाल है
बेतरह जाम से जीना मुहाल है
दशको की आज़ादी ने दो देश बनाया है
झुग्गियो में भारत,महलों में इंडिया बसायाहै.
रचना -आनंद मोहन,पुर्व सांसद