भ्रष्टाचार

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हर्षद की दहशत,जैन का अद्भूत कांड हवाला ।
सबसे ऊपर जा बैठा है,पशुपालन बन आला ।।
नेता जी का चमचा-बेलचा,भवन के ठेकेदार ।
प्रजातंत्र को लूट रहे हैं,देखो पहरेदार ।।
दस प्रतिशत् डी .डी .सी दस डी.एम. ,दस अभियंता ।
तीस प्रतिशत् ठेकेदार का,समझ रही सब जनता |

रचना –डॉ मनोरंजन झा