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नयी तरीके से होगा फ़ास्ट ट्रैक नी  रीप्लेसमेंट आसान : डॉ मदन मोहन रेड्डी

पटना डेस्क :‘ऑर्थोपेडिक जगत में नी  रीप्लेसमेंट (घुटना प्रतिस्‍थापन) एक सफल तरीका माना जाता है। ये 30 सालों से प्रयोग में लाया जा रहा है।  समय के साथ – साथ इसके तकनिकी पहलुओं में भी काफी सुधर आया है। जिससे ऑपरेशन के बाद पैन मैनजमेंट और पैनलेस फिजियोथेरेपी से मरीज़ों की रिकवरी खुद ब खुद सरल हो जाती है। अब इसी इनोवेशन में अपोलो हॉस्पिटल द्वारा नयी फ्लॉसफी से फ़ास्ट ट्रैक नी  रीप्लेसमेंट और भी आसान हो गया है।‘ ये कहना है देश के ख्‍यातिप्राप्‍त सीनियर ज्‍वाइंट रिप्‍लेशमेंट सर्जरी कंस्‍लटेंट डॉ मदन मोह‍न रेड्डी का।

इससे पहले आज पटना में साईं फिजियोथेरेपी क्लिनिक द्वारा आयोजित नि:शुल्‍क जांच शिविर डॉ रेड्डी ने सैकड़ों मरीजों का नि:शुल्‍क इलाज किया। इस दौरान साईं फिजियोथेरेपी क्लिनिक के डायरेक्‍टर डॉ राजीव कुमार सिंह भी मौजूद रहे। इस दौरान डॉ रेड्डी ने बताया कि नई फ्लॉसफी के साथ ‘फ़ास्ट ट्रैक कनी रिप्लेसमेंट का मुख्य उद्देश्य है कम दर्द, तेज़ रिकवरी, कोई दर्दनाक फिजियोथेरेपी न हो और साथ ही मारीज़ विश्वसनीय नतीजे पाएं। आज महिलाओं में ऑर्थोपेडिक सम्बन्धित समस्याएं करीब 42% है, वहीं पुरुषों में ये 21% है। आम तौर पर 60 वर्ष से ऊपर के लोग इस समस्या के शिकार होते हैं। हर वर्ष भारत में कम से काम एक लाख की आबादी को इस ऑपरेशन से गुज़रना पड़ता है। माना जा रहा है कि यह 20% सालाना की रफ़्तार से और बढ़ेगा।

उन्‍होंने बताया कि सर्जरी की शुरुआत सिंगल शॉट स्पाइनल एनेस्थीसिया से होती है। इससे ऑपरेशन का समय घट जाता है और मरीज़ को अपने पैरों की ताकत दो से तीन घण्टों में वापस मिल जाती है। इस सर्जरी के दौरान किसी भी प्रकार का टूर्निकेट का प्रयोग नहीं होता है। इस वजह से मरीजों को दर्द कम झेलना पड़ता है। डॉ रेड्डी ने बताया कि दूसरा तरीका मिनिमल इनवेसिव सर्जरी है, जिसमें चमड़ी के कुछ हिस्से को चीरा जाता है।  इससे दर्द काम जाता है। ताकि मरीज़ों को जल्दी से रीकवर किया जा सके।  इस सर्जरी के लिए किसी भी कथेटर का प्रयोग नहीं होता है। इसे ऑपरेशन के बाद इन्फेक्शन का खतरा कम हो जाता है।

डॉ रेड्डी ने कहा कि हमारे घुटने के प्रतिस्थापन के सभी क्रूसेटेट सर्जरी अपरिपक्व हैं। ऑपरेशन के बाद इस विशेष तकनीक को प्रोप्रोएसेप्टिव फ़ंक्शन प्राप्त करने में मदद मिलती है और सीढ़ी चढ़ाई विशेषकर अधिक प्राकृतिक होती है। सर्जरी के दस दिन बाद मरीज बिना किसी सहारे के भी चल सकते हैं। अपोलो हॉस्‍पीटल, चेन्‍नई में  नी  रीप्लेसमेंट सर्जरी प्रोटोकॉल द्वारा संचालित होते हैं।

अंत में डॉ रेड्डी ने बताया कि तेजी से रिकवरी,कम से कम (या) कोई दर्द नहीं, विश्वसनीय परिणाम, शून्य संक्रमण दर, कोई दर्दनाक फिजियोथेरेपी, अस्पताल से प्रारंभिक छुट्टी, रोगी जल्द ही सामाजिक और मनोरंजक सक्रिय कर सकते हैं और  इसकी लागत प्रभावी  होना  फ़ास्ट ट्रैक नी  रीप्लेसमेंट का खास एडवांटेज है।

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